10 April 2013

सूरज न बन पाये तो बनके दीपक जलता चल



बात जब संगीत निर्देशकों की होती है तो हमारे मन में एसडी-आर डी बर्मन, मदन मोहन, ओ पी नैय्यर, कल्याण जी आनद जी, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल, खैय्याम आदि के नाम तो आते हैं, लेकिन हम अक्सर एक नाम भूल जाते हैं।। य़ह अलग बात है कि आज भी कही जब उनके संगीत से सजे गीत जब हमें सुनने को मिलते हैं, तो हमारे कदम बरबस ठिठक जाते हैं ...हम मधुबन की खुशबू को  तो  ढलती रातों में घुलते महसूस करते हैं लेकिन संगीत का मधुबन बनेवाली हिंदी सिनेमा की इस महिला संगीतकार का नाम याद करने में अक्सर मुश्किल का सामना करते हैं।। कितनों को तो शायद यह नाम मालूम भी नहीं।। यहाँ बात हो रही है हिंदी सिनेमा की पहली स्थापित महिला संगीतकार उषा खन्ना उषा खन्ना कि. उषा खन्ना पर यह छोटा सा लेख लिखा है प्रीति सिंह परिहार ने. आप भी पढ़ें।।  : अखरावट 






जिंदगी प्यार का गीत है, इसे हर दिल को गाना पड़ेगा’ गीत को अपने संगीत से सजाने से बहुत पहले ही उन्होंने गीतों के इर्द-गिर्द अपनी एक दुनिया बनाने का सपना बुन लिया था़.  इस सपने को लेकर वे बड़ी हुईं।  यह सपना साकार भी हुआ पर जरा सी तब्दीली के साथ़। सपने का आधार संगीत ही रहा पर आकार कुछ अलग बना़।  हुआ यूं कि वे आयीं तो गायिका बनने थीं, लेकिन उनमें एक बेहतरीन संगीतकार का हुनर था. उनके असली हुनर की पहचान हुई और पहली ही फिल्म के संगीत से यह पहचान प्रसिद्घि पाने लगी़  अपने संगीत से उन्होंने तीन दशक तक लगभग ढाई सौ फिल्मों के गीतों को अपनी धुनों से सजाया़  आज उनके नाम का जिक्र भले कभी-कभार होता हो, लेकिन हिंदी सिनेमा के संगीतकारों की बात उनके नाम के बिना शुरू नहीं हो सकती़  जी हां, बात हो रही है हैं प्रसिद्घ महिला संगीतकार उषा खन्ना की़।  वही उषा खन्ना जिन्होंने ‘छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी’, ‘मधुबन खुशबू देता है’ जैसे यादगार गीतों की धुन बनायी़।

मध्यप्रदेश के ग्वालियर में जन्मी उषा खन्ना ने संगीत की विधिवत शिक्षा नहीं ली थी़। पिता मनोहर खन्ना शास्त्रीय संगीत के ज्ञाता थे और गीत लिखा करते थे़।  पिता के संगीत प्रेम ने उषा को भी संगीत की ओर मोड़ा़ वे पिता के लिखे गानों की धुन बनातीं, फिर उन्हें खुद गाती भी थीं।  अरबी संगीत ने भी उन्हें अत्यधिक प्रभावित किया़।

अपनी पहली धुन महज सोलह साल की उम्र में बनाने वाली उषा को गायिका बनने की ख्वाहिश फिल्मी दुनिया में लेकर आयी, उन्होंने कुछ गीत गाये भी, लेकिन उनकी पहचान शायद संगीतकार के तौर पर ही होनी थी़।  पचास के दशक में वे जब गायिका के तौर पर मौका पाने के लिए शशिधर मुखर्जी से मिलीं, तो उन्होंने अपनी ही धुनों से सजाये कुछ गीत उन्हें सुनाये़।  उषा खन्ना ने अपने एक साक्षात्कार में बताया था, उनके गीत सुन कर शशिधर मुखर्जी ने कहा ‘क्या तुम्हें लगता है कि तुम लता और आशा जैसी गायिकाओं से अच्छा गाती हो? ये गीत अगर तुमने बनाये हैं, तो तुम संगीतकार क्यों नहीं बन जातीं? अगले कुछ महीनों तक वे उषा से हर रोज दो गानों की धुन बनवाते़।  अच्छी तरह परखने और उनकी बनायी कई धुनों को सुनने के बाद 1959 उन्होंने ‘दिल दे के देखो’ में उषा को बतौर संगीतकार मौका दिया़।  इस पहली ही फिल्म के गीतों की सफलता ने उनके लिए संगीत की दुनिया का रास्ता तैयार कर दिया़। 1979 में उषा खन्ना के संगीत से सजे ‘दादा’ फिल्म के गीत ‘दिल के टुकड़े-टुकड़े करके मुस्कुरा के चल दिये’ के लिए के यसुदास को फिल्म फेयर अवार्ड मिला़।  उषा खन्ना के कंपोजीशन में मोहम्मद रफी और आशा भोंसले ने क ई प्रसिद्ध गीत गाये़।

‘पल भर के लिए कोई हमें प्यार कर ले’, ‘जिंदगी प्यार का गीत है’ और ‘शायद मेरी शादी का ख्याल दिल में आया है’ जैसे अनगिनत यादगार गीत उषा खन्ना के संगीत के पिटारे से निकले हैं. उन्होंने कुछ मलयालम फिल्मों में भी संगीत दिया जिन्हें खासा पसंद किया गया़ फिल्मकार और गीतकार सावन कुमार ने उनके लिए सबसे अधिक गीत लिखे, जिनमें से ज्यादातर लोकप्रिय हुए़।  2003 में ‘दिल परदेसी हो गया’ फिल्म में संगीत देने के बाद से उनका नाम किसी फिल्म में बतौर संगीतकार नहीं दिखा़।  इस बीच कई धारावाहिकों में उनके संगीत देने की खबरें जरूर आती रहीं.  उषा की धुन से सजा ‘साजन बिना सुहागन’का गीत ‘मधुबन खुशबू देता है’ की खुशबू आज भी संगीतप्रेमियों के मन में कायम है़।  इस गीत के अंतरे में एक पंक्ति है-‘सूरज न बन पाये, तो बनके दीपक जलता चल’.  उषा खन्ना बेशक सूरज की तरह चमकने की काबीलियत रखती हैं, लेकिन उन्होंने दीपक की तरह जलते रहना चुना़  उषा खन्ना के बरक्स एक हद तक यह बात सच भी लगती है़  उन्होंने आज गायिकी में स्थापित कई बड़े नाम मसलन, पंकज उदास, रूप कुमार राठौर और सोनू निगम को पहला मौका दिया था़  लेकिन उगते सूरज को सलाम करने के आज के समय में लाखों श्रोताओं के दिलों में सुकून का दीया जलानेवाली उषा खन्ना का जिक्र कहीं नहीं दिखता.                                


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