31 March 2013

फिल्म मेकिंग की किताब है ‘प्यासा’ : राकेश ओम प्रकाश मेहरा


कुछ फिल्में एक याद की तरह जिंदगी में रह जाती हैं. यह याद गुजरते वक्त के साथ भी धुंधली नहीं पड.ती. उसके संवाद, दृश्य और किरदार एक हल्की-सी आहट पाकर सामने आ खडे. होते हैं. ऐसी ही एक फिल्म की याद  को उर्मिला कोरी के साथ साझा किया है. फिल्मकार राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने. 


सिनेमा से मेरी शुरुआती पहचान रविवार के दिन दूरदर्शन पर आनेवाली ब्लैक एंड व्हाइट फिल्मों और ऑल इंडिया रेडियो पर फिल्मों के संवादों के माध्यम से हुई थी. बीतते सालों के साथ यह पहचान दोस्ती और दोस्ती जल्द ही प्यार में बदल गयी. जिस तरह से प्यार में दिमाग से नहीं दिल की सुनते हैं, ऐसे ही मुझे लगता है कि सिनेमा दिल से देखने की चीज है, दिमाग से नहीं. बस शर्त यह होनी चाहिए कि वह दिल को छू सकने का माद्दा भी रखता हो. एक ऐसा सिनेमा जो मनोरंजन के साथ-साथ एक सोच भी दे, मेरे लिए वही फिल्म है. यह सब मैंने गुरुदत्त की फिल्म ‘प्यासा’ में पाया है. 

आम तौर पर लोग ‘प्यासा’ को मुख्य रूप से एक रोमांटिक फिल्म मानते हैं, लेकिन गौर करें तो यह फिल्म समाज पर भी पैनी चोट करती है. आजादी के बाद नेहरू और गांधी के दिखाये सपने जब टूट रहे थे और देश बेरोजगारी और भुखमरी का शिकार हो रहा था, तो इस फिल्म का गीत ‘जिन्हें हिंद पर नाज है..’ के शब्द पूरी तरह से व्यवस्था पर प्रहार करते हैं. साथ ही इसमें दुनिया का अजीब रंग भी दिखाया गया है. जिस प्रतिभाशाली शायर विजय को जमाने ने ठुकरा दिया था, उसी को मुर्दा समझ कर वही जमाना सिर आंखों पर बैठाने को तत्पर हो गया. आखिर हम मरने के बाद ही लोगों की कद्र क्यों करते हैं!

इस फिल्म के जरिये गुरुदत्त ने यह बात फिर साबित कर दी थी कि वह अद्भुत फिल्मकार थे. उन्होंने जिस तरह से फिल्म के क्लाइमेक्स को रचा था, अंधेरे सभागार के दरवाजे से आ रहे प्रकाश के बीच, सलीब पर टंगे ईसा मसीह की मुद्रा में दरवाजे पर खडे. विजय की छवि, वह सीन हिंदी सिनेमा के यादगार फ्रेमों में से एक था. फोटोग्राफी का बेजोड. संगम था. इस फिल्म के लिए छायाकार वीके मूर्ति की भी जितनी तारीफ की जाये कम है. अभिनय के लिहाज से भी यह फिल्म क्लासिक है. वहीदा जी, गुरुदत्त, रहमान और माला सिन्हा सभी बेहतरीन थे. कुल मिला कर ‘प्यासा’ फिल्ममेकिंग की किताब है, जिसका हर फ्रेम, संवाद, गीत-संगीत आपके दिल को छू जाता है. 

                                                                                 उर्मिला कोरी युवा फिल्म  रिपोर्टर हैं 
     

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